Tuesday, June 25, 2013

धारा देवी की प्राचीन प्रतिमा








चंडीगढ़। उत्तराखंड के लोगों और चारों धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की रक्षक मानी जाने वाली धारा देवी की प्राचीन प्रतिमा को 16 जून को शाम छह बजे हटाया गया और रात्रि आठ बजे अचानक बजने लगा तबाही का ढंका। उत्तराखंड में आए इस सैलाब ने मौत का तांडव रचा और सबकुछ तबाह कर दिया जबकि दो घंटे पूर्व मौसम सामान्य था।
कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तराखंड में आई दैवीय आपदा का कारण धारी देवी को इसलिए माना जा रहा है धारी शब्द का मतलब 'रखना' होता है जबकि वहां से धारी देवी को हटा दिया गया। बस फिर क्या था, इस चर्चा के बाद स्थानीय समाचार पत्र व सोशल साइट्स सक्रिय हो गई और इस मुद्दे पर तर्क वितर्क सामने आने लगे। 
अब इन बातों में कितनी सच्चाई है यह तो बता पाना मुश्किल है लेकिन कुछ सवाल आज भी उत्तराखंड के उन 
पहाड़ियों में गूंज रहे हैं, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है-
श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र में एक बहुत ही प्राचीन सिद्ध पीठ है जिसे 'धारी देवी' का सिद्धपीठ कहा जाता है। इसे दक्षिणी काली माता भी कहते हैं। मान्यता अनुसार उत्तराखंड में चारों धाम की रक्षा करती है ये देवी। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है। महा विकराल इस काली देवी की मूर्ति स्थापना और मंदिर निर्माण की भी रोचक कहानी है। मूर्ति जाग्रत और साक्षात है।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर कलियासौड़ में अलकनन्दा नदी के किनारे सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर स्थित है, लेकिन नदी पर बांध बनाने के चक्कर में कांग्रेस सरकार ने इस देवी के मंदिर को तोड़ दिया और मूर्ति को मूल स्‍थल से हटाकर अन्य जगह पर रख दिया।
पिछले दो वर्षों से इस मंदिर को बचाने के प्रयास के तहत, राज्य सरकार, केंद्र सरकार और राष्ट्रपति तक को पत्र ल‍िखे गए और कोर्ट में यह मामला था, लेकिन किसी ने भी आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर विचार नहीं किया।

पिछले दो वर्षों से इस मंदिर को बचाने के लिए आंदोलन चल रहा था। आंदोलन में हजारों साधु-संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पर्यावरणविदों ने भाग लिया था। लेकिन उत्तराखंड की सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और अंतत: उत्तराखंड की रक्षक देवी मानी जाने वाली 'धारी देवी' के शक्तिपीठ को तोड़ दिया गया।

समूचा हिमालय क्षेत्र मां दुर्गा और भगवान शंकर का मूल निवास स्थान माना गया है। इस स्थान पर मानव ने जब से अपनी गतिविधियां बढ़ाना शुरू की है तब से जहां प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई है वहीं यह समूचा क्षेत्र अब ग्लेशियर की चपेट में भी आने लगा है।




अलकनंदा व मंदाकिनी नदी का जलस्तर काफी अधिक बढ़ गया है, जिससे नदी किनारे रह रहे लोगों को प्रशासन ने सतर्क कर दिया। रुद्रप्रयाग, सिल्ली, अगस्तमुनि, विजयनगर, स्यालसौड़, गिवाला, गौरीकुंड, तिलबाड़ा समेत कई स्थानों पर नदी किनारे रह रहे तकरीबन बीस हजार लोगों को प्रशासन के सहयोग से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। वहीं, गौरीकुंड बाजार का आधा हिस्सा, सोनप्रयाग, चंद्रापुरी, सिल्ली आदि कस्बे पूरी तरह से जलमग्न हो गए। पुलिस कंट्रोल रूम का संपर्क रामबाड़ा व केदारनाथ से पूरी तरह कटा हुआ है। इससे वहां के नुकसान का सही आकलन नहीं हो पा रहा है।


 केदारनाथ में महाप्रलय
 अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब

PICS:अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब
चंडीगढ़। उत्तराखंड में गंगा मां के कहर से शिव भगवान की प्रतिमा और कई मंदिर भी नहीं बच पाए। हजारों श्रद्धालुओं की चार धाम यात्रा ने जान जोखिम में डाल दी है। ऐसा रौद्र रूप शायद ही पहले गंगा ने दिखाया होगा। इसे संयोग कहें या कुदरत का करिश्मा कि हिंदुओं के सबसे बड़े आस्था के केंद्र बाबा अमरनाथ में जहां शिवलिंग पिघल रहा है, वहीं दूसरी और गंगा मां नाराज दिखाई दे रही है।
यहां एक और अहम बात यह है कि उत्तरांचल के पाताल भुवनेश्वर में गुफा में पड़ा एक शिवलिंग जिसकी लंबाई बढ़ती जा रही है, उसके बारे में कहा जाता है कि इस शिवलिंग के गुफा की छत को छू लेने पर दुनिया का अंत हो जाएगा। कुदरत के इस कहर के चलते और अब हो रहा ये सब ।
PICS:अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब
लगातार जारी है बारिश का कहर। 75 लोग लापता हैं। रुद्रप्रयाग जिले में लगातार बारिश हो रही है। गत रात्रि केदारनाथ व रामबाड़ा में हुई त्रासदी के बाद सोमवार को दूसरे दिन भी मंदाकिनी नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई। इससे जिले के रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर सोनप्रयाग और चंद्रापुरी कस्बे पूरी तरह जलमग्न हो गए। बीस हजार से अधिक लोगों को नदी किनारे से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। अब तक बारह झूला पुल व तीन मोटर पुल नदी में समा चुके हैं। पूरे जिले में हाई एलर्ट घोषित किया गया है।
PICS:अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब
केदारनाथ व रामबाड़ा का संपर्क पूरी तरह कटने से यहां हुई जनहानि का अनुमान नहीं लग पा रहा है। वहीं, आज पूरे दिन मौसम खराब होने से पंद्रह हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्र में उड़ान नहीं भर सके। दो दिन के दौरान भूस्खलन की चपेट में आने से अब तक केदारनाथ में पांच, रामबाड़ा में तीन व भीमबलि में दो लोगों की मौत की पुष्टि प्रशासन ने की है। साथ ही, रामबाड़ा में 50 व केदारनाथ में 15 लोगों के लापता होने का समाचार है।


रामबाड़ा व केदारनाथ समेत विभिन्न स्थानों पर तीन सौ से अधिक दुकानें व मकान के नदी में बहने की सूचना है। गौरीकुंड में तीन हजार से अधिक यात्री अपनी जान बचाकर गौरी गांव में शरण लिए हुए हैं। यहां यात्रियों की स्थानीय ग्रामीण भोजन आदि दे रहे हैं। पूरे दिन मौसम खराब होने व लगातार बारिश होने से राहत कार्य शुरू नहीं किया जा सका। सेना व आईटीबीपी की टीमें जिले में पहुंच गई हैं, लेकिन रास्ता ठीक न होने से अभी तक प्रभावित क्षेत्र में नहीं पहुंच पाई हैं। डीएम विजय कुमार ढौडियाल ने बताया कि राहत कार्य शुरू करने के लिए मौसम के ठीक होने का इंतजार किया जा रहा है। इसके लिए पंद्रह हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।


PICS:अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब
रामबाड़ा व केदारनाथ समेत विभिन्न स्थानों पर तीन सौ से अधिक दुकानें व मकान के नदी में बहने की सूचना है। गौरीकुंड में तीन हजार से अधिक यात्री अपनी जान बचाकर गौरी गांव में शरण लिए हुए हैं। यहां यात्रियों की स्थानीय ग्रामीण भोजन आदि दे रहे हैं। पूरे दिन मौसम खराब होने व लगातार बारिश होने से राहत कार्य शुरू नहीं किया जा सका। सेना व आईटीबीपी की टीमें जिले में पहुंच गई हैं, लेकिन रास्ता ठीक न होने से अभी तक प्रभावित क्षेत्र में नहीं पहुंच पाई हैं। डीएम विजय कुमार ढौडियाल ने बताया कि राहत कार्य शुरू करने के लिए मौसम के ठीक होने का इंतजार किया जा रहा है। इसके लिए पंद्रह हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।


PICS:अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब
पंद्रह पुल बहे, पचास हजार का संपर्क कटा। जिले के पंद्रह झूला व मोटर पुल भी अलकनंदा व मंदाकिनी नदियों के बढ़े जल स्तर की भेंट चढ़ गए। इन पुलों के बह जाने से जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के लगभग पचास हजार से अधिक ग्रामीणों का संपर्क कट गया है। अक्सर शांत बहने वाली नदियों के जल स्तर में ऐसी बढ़ोत्तरी हुई की चारो ओर त्राहि- त्राहि मच गई। भारी जनहानि होने के साथ ही जिले के कई गांवों के लिए भी मुसीबत बन गई। हिमालयी क्षेत्र में हुई लगातार बारिश से नदियों का जल स्तर इतना बढ़ा कि अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदियों पर अब तक 12 पैदल पुल एवं तीन वाहनों के पुल बह गए। इसमें पपड़ाडू, संगम, मेदनपुर, सिल्ली, रतूड़ा, कालीमठ, रामबाड़ा, केदारनाथ, कोठगी समेत विभिन्न गांवों को जोड़ने वाले पैदल पुल एवं रुद्रप्रयाग बाईपास पर बने दो मोटर पुल व कुंड का पुल भी इन नदियों की चपेट में आने से ध्वस्त हो गए। रुद्रप्रयाग एवं तिलवाड़ा में दो मोटर पुलों को आंशिक क्षति पहुंची है। पुलों के नदियों में जमीदोंज होने से भरदार, सिलगढ़, बड़मा, तल्लानागपुर और समूचे केदारघाटी के लगभग पचास हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

PICS:अमरनाथ में पिघलता शिवलिंग, गंगा की नाराजगी और अब ये सब
 टिहरी जनपद में विभिन्न स्थानों पर हुए भूस्खलन के मलबे में दबने से आठ की मौत हो गई, जबकि देवप्रयाग क्षेत्र में पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों की चपेट में आकर वाहन चालक की मौत हो गई। मूसलाधार बारिश से जिले में करीब 60 मकान और 30 से अधिक दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई भवन खतरे की जद में आ गए हैं। खतरे को देख प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने मकान खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
प्रतापनगर प्रखंड के गड़ गांव में सुबह भूस्खलन होने से शूरवीर लाल का मकान दब गया। इसमें सो रही शूरवीर की माता 60 वर्षीय बुरांशी देवी तथा पुत्र 14 वर्षीय संतोष व सात वर्षीय पुत्री अंकिता की दबकर मौत हो गई। पटवारी मोहन लाल ने घटना स्थल पर पहुंचकर मौका मुआयना कर पंचनामे के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया।

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