Monday, June 24, 2013

उत्तराखंड में हुई तबाही एक सामान्य प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक देवी का अभिशाप है?

 
उत्तराखंड में हुई तबाही एक सामान्य प्राकृतिक
आपदा नहीं, बल्कि एक देवी का अभिशाप है?
उत्तराखंड में हुई तबाही में करीब
दौ सौ लोगों की मौत हो गई और हजारों लापता हैं.
इस तबाही की वजह तेज बारिश और बादल के फटने
से आई बाढ़ है. लेकिन कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि ये
प्रलय एक सामान्य प्राकृतिक आपदा नहीं,
बल्कि एक देवी का अभिशाप है.
लोगों का मानना है कि 'धारी देवी' उत्तराखंड के
धामों की रक्षक हैं. वे देवभूमि में आनेवाले
श्रद्धालुओं की रक्षक हैं. लेकिन बांध बनाने के लिए
धारी देवी को उस स्थान से हटा दिया गया जहां वे
बरसों से देवभूमि की रक्षा कर रही थीं. तो क्या ये
प्रलय उसी गलती का नतीजा है.
गढ़वाल क्षेत्र के श्रीनगर में अलकनंदा नदी के
किनारे पहाड़ी पर स्थित माता का मंदिर है मान्यता है
कि धारी देवी समूचे देवभूमि की रक्षक हैं.
मान्यता ये भी है कि हर दिन माता यहां तीन रूप में
नज़र आती हैं. पहला रूप कुमारी कन्या, दूसरा रूप
युवती का और तीसरा वृद्ध माता का.
बताया जाता है कि माता के सिर पर छत लगाने
की कई कोशिशें की गई लेकिन
कभी लगाया नहीं जा सका. वर्तमान मंदिर के स्वरूप
में भी माता की मूर्ति के ऊपर छत नहीं है.
कहा ये भी जाता है कि जिस दिन धारी देवी को मूल
स्थान से हटाया जा रहा था उस दिन भी भयानक

 
 
 तूफान आया था.
इस प्रलय के पीछे यही वजह है ऐसा न
कहा जा सकता है न विज्ञान ऐसा मानता है.
 
उत्तराखंड में बारिश से भारी तबाही मची है। हम आपको उत्तराखंड से जुड़ी ताजा अपडेट दे रहे हैं। सेना और आईटीबीपी से जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है। लेकिन जो तस्वीर उभरकर आ रही है वो बेहद दर्दनाक है।
-उत्तराखंड सरकार के सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि केदारनाथ यात्रा शुरू होने में 2 से 3 साल लग सकते हैं। कुछ गांवों में पहुंचने तक 2 से 3 हफ्ते लग सकते हैं। कई गांव पानी में बहकर पूरी तरह खत्म हो गए हैं।

-प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी देहरादून पहुंचे।
-सुशील कुमार शिंदे: दो बजे पीएम और सोनिया जी केदारनाथ जाएंगे। आईटीबीपी और एनडीआरएफ चार हजार लोगों को बचाया है। आईटीबीपी के तीन से चार बटालियन काम कर रहे हैं। आईटीबीपी ने 6400 लोगों को आश्रय दिया है। 11 हजार 400 लोगों को बजाया था। पांच हजार को आर्मी ने रेस्क्यू किया गया। 7 हजार लोग अभी भी फंसे हुए हैं। गौरी कुंड से गुप्त काशी तक लाया जा रहा है। कंट्रोल सेंटर बद्रीनाथ में बनाया गया है। उत्तराखंड के सीएम के बात कर रहा हूं। आज वो केदारनाथ गए हैं। पीड़ितों को फूड पैकेट दिए जा रहे हैं। हेलिकॉप्टर से निकालने का प्रयास जारी है।
- अजय चड्ढा, आईटीबीपी डीजी: गोविंदघाट से 4 हजार लोगों को निकाला है। हम खाना और मेडिकल सपोर्ट दे रहे हैं। एक पुल के टूट जाने से दिक्कत हो रही। उत्तरकाशी में रास्ता टूट जान की वजह से पहुंच नहीं पा रहे हैं। रोड पहले बनाई जा रही है। पर्यटकों को भी पैदल चलना पड़ रहा है। साथ ही कई वाहन बह गए हैं। कई इलाको में हम पुलों के टूटने के वजह से नहीं पहुंच पा रहे हैं।
-मुरली मनोहर जोशी: इस मौसम में हिमालयन इलाकों में जहां कहीं भी ऐसी घटनाएं होती हैं उनको रोकना मुश्किल हो जाता है। जब इन इलाकों में सड़कें बनती हैं तो धमाकों से पर्वतों की मजबूती कम हो जाती है। इन इलाकों में विकास के नाम पर अगर हिमालय की अनदेखी की जाएगी तो ये तो होगा। ये आश्चर्य की बात है कि केदारनाथ का मंदिर बच गया।
-राजनाथ सिंह: पता नहीं कितने हजारों लोग इस हादसे में मरे हैं। मैंने बीजेपी के कार्यकर्ताओं से कहा है के वहां राहत कैंप लगाए और उत्तराखंड और केंद्र सरकार से भी गुजारिश है कि जितना हो सके मदद पहुंचाई जाए।
- सशस्त्र सीमा बल आकादमी (SSB) को करीब 100 करोड़ का नुक्सान हुआ है। उफनती अलकनंदा ने 2 महीने पहले 4 करोड़ की लागत से बने अधिकारी प्रशासक केंद्र को भी तबाह कर दिया है। यहां अलकनंदा की एक धारा ने आपनी दिशा भी बदल दी है। नदी धारा SSB की ओर ले बहने लगी है। अलकनंदा द्वारा मचाई गई तबाही का आलम यह है कि SSB के बद्री स्टेडियम के साथ ही रिक्रूटों की बैरकों का तो नामोनिशान ही मिट गया।
-66 हजार लोग अब भी फंसे, आईटीबीपी ने 9 हजार लोगों को निकाला। केदारनाथ में ही 50 लोगों की मौत।
-महाराष्ट्र सरकार ने उत्तराखंड सरकार को 10 करोड रुपये की मदद की घोषणा की है। सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है की देहरादून के लिए विशेष विमान भेजेगी। इस विमान से महाराष्ट्र के यात्रियों को वापस लाया जाएगा।
-गौरीकुंड से करीब 5 हजार लोग लापता हैं। लापता सभी लोग पिट्ठू हैं जो पर्यटकों को एक जगह से दूसरे जगह ले जाते हैं। बताया जाता है कि नदी के रास्ता बदल देने से आई भयंकर बाढ़ में लोग लापता हो गए।
-टिहरी से NDRF की टीम रुद्र प्रयाग रवाना हो गई है। रुद्रप्रयाग में परसों बादल फटा था और बड़ी तादाद लोगों के हताहत होने की आशंका है। वहां कई गांव बह गए हैं। कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो चुका है।
-एनडीआरएफ टीम को सड़क मार्ग से भेजा जा रहा है। रास्ते में जगह लैंडस्लाइड है और मार्ग टूटा हुआ है। केदारनाथ की तरफ जाने वाला रास्ता बेहद खराब है।
-सड़कें टूटी हुई हैं, कई जगहों पर लैंडस्लाइड हुआ है। 100 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं और 200 से ज्यादा लोगों के मरने की आशंका है। अब भी 1000 से ज्यादा लोग लापता हैं।
-ट्रेकिंग पर 40 लोग फंसे हुए हैं जिनमें विदेशी भी शामिल हैं। आज लगातार दूसरे दिन मौसम खुला है ,उम्मीद है कि आज राहत कार्यों में तेजी आएगी। आज 6 और हेलीकॉप्टर राहत कार्यों में लगाए जाएंगे। यानी कुल 16 हेलीकॉप्टर राहत कार्य में लगेंगे।
-उत्तराखंड में जगह-जगह लोग फंसे हुए हैं। टिहरी में ऐसे ही कुछ सैलानियों को बचाया गया। ये सैलानी गंगोत्री की यात्रा से वापस लौट रहे थे तभी बारिश और बाढ़ की चपेट में आकर बीच रास्ते में फंस गए। ये लोग मुख्य रास्ते पर एक पुल के बह जाने के बाद पानी से घिर गए थे।
- सेना के जवान और पुलिसवालों ने इन लोगों को रस्सी और टोकरी की मदद से बाहर निकाला। इन सभी को टिहरी के आपदा बचाव केंद्र में पहुंचाया गया है। जहां से इन्हें आगे भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि अभी भी 70-80 से लोग फंसे हुए हैं। प्रशासन उन्हें निकालने के इंतजाम कर रही है।
- यूपी के सीएम अखिलेश ने उत्तराखंड को 25 करोड़ रुपये की सहायता दी है। इसके अलावा अगर आज मौसम साफ रहा तो पीएम मनमोहन सिंह दोपहर दो बजे उत्तराखंड में प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा करेंगे।
Photo: उत्तराखंड में बारिश से भारी तबाही मची है। हम आपको उत्तराखंड से जुड़ी ताजा अपडेट दे रहे हैं। सेना और आईटीबीपी से जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है। लेकिन जो तस्वीर उभरकर आ रही है वो बेहद दर्दनाक है।
-उत्तराखंड सरकार के सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि केदारनाथ यात्रा शुरू होने में 2 से 3 साल लग सकते हैं। कुछ गांवों में पहुंचने तक 2 से 3 हफ्ते लग सकते हैं। कई गांव पानी में बहकर पूरी तरह खत्म हो गए हैं।

-प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी देहरादून पहुंचे।
-सुशील कुमार शिंदे: दो बजे पीएम और सोनिया जी केदारनाथ जाएंगे। आईटीबीपी और एनडीआरएफ चार हजार लोगों को बचाया है। आईटीबीपी के तीन से चार बटालियन काम कर रहे हैं। आईटीबीपी ने 6400 लोगों को आश्रय दिया है। 11 हजार 400 लोगों को बजाया था। पांच हजार को आर्मी ने रेस्क्यू किया गया। 7 हजार लोग अभी भी फंसे हुए हैं। गौरी कुंड से गुप्त काशी तक लाया जा रहा है। कंट्रोल सेंटर बद्रीनाथ में बनाया गया है। उत्तराखंड के सीएम के बात कर रहा हूं। आज वो केदारनाथ गए हैं। पीड़ितों को फूड पैकेट दिए जा रहे हैं। हेलिकॉप्टर से निकालने का प्रयास जारी है।
- अजय चड्ढा, आईटीबीपी डीजी: गोविंदघाट से 4 हजार लोगों को निकाला है। हम खाना और मेडिकल सपोर्ट दे रहे हैं। एक पुल के टूट जाने से दिक्कत हो रही। उत्तरकाशी में रास्ता टूट जान की वजह से पहुंच नहीं पा रहे हैं। रोड पहले बनाई जा रही है। पर्यटकों को भी पैदल चलना पड़ रहा है। साथ ही कई वाहन बह गए हैं। कई इलाको में हम पुलों के टूटने के वजह से नहीं पहुंच पा रहे हैं।
-मुरली मनोहर जोशी: इस मौसम में हिमालयन इलाकों में जहां कहीं भी ऐसी घटनाएं होती हैं उनको रोकना मुश्किल हो जाता है। जब इन इलाकों में सड़कें बनती हैं तो धमाकों से पर्वतों की मजबूती कम हो जाती है। इन इलाकों में विकास के नाम पर अगर हिमालय की अनदेखी की जाएगी तो ये तो होगा। ये आश्चर्य की बात है कि केदारनाथ का मंदिर बच गया।
-राजनाथ सिंह: पता नहीं कितने हजारों लोग इस हादसे में मरे हैं। मैंने बीजेपी के कार्यकर्ताओं से कहा है के वहां राहत कैंप लगाए और उत्तराखंड और केंद्र सरकार से भी गुजारिश है कि जितना हो सके मदद पहुंचाई जाए।
- सशस्त्र सीमा बल आकादमी (SSB) को करीब 100 करोड़ का नुक्सान हुआ है। उफनती अलकनंदा ने 2 महीने पहले 4 करोड़ की लागत से बने अधिकारी प्रशासक केंद्र को भी तबाह कर दिया है। यहां अलकनंदा की एक धारा ने आपनी दिशा भी बदल दी है। नदी धारा SSB की ओर ले बहने लगी है। अलकनंदा द्वारा मचाई गई तबाही का आलम यह है कि SSB के बद्री स्टेडियम के साथ ही रिक्रूटों की बैरकों का तो नामोनिशान ही मिट गया।
-66 हजार लोग अब भी फंसे, आईटीबीपी ने 9 हजार लोगों को निकाला। केदारनाथ में ही 50 लोगों की मौत।
-महाराष्ट्र सरकार ने उत्तराखंड सरकार को 10 करोड रुपये की मदद की घोषणा की है। सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है की देहरादून के लिए विशेष विमान भेजेगी। इस विमान से महाराष्ट्र के यात्रियों को वापस लाया जाएगा।
-गौरीकुंड से करीब 5 हजार लोग लापता हैं। लापता सभी लोग पिट्ठू हैं जो पर्यटकों को एक जगह से दूसरे जगह ले जाते हैं। बताया जाता है कि नदी के रास्ता बदल देने से आई भयंकर बाढ़ में लोग लापता हो गए।
-टिहरी से NDRF की टीम रुद्र प्रयाग रवाना हो गई है। रुद्रप्रयाग में परसों बादल फटा था और बड़ी तादाद लोगों के हताहत होने की आशंका है। वहां कई गांव बह गए हैं। कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो चुका है।
-एनडीआरएफ टीम को सड़क मार्ग से भेजा जा रहा है। रास्ते में जगह लैंडस्लाइड है और मार्ग टूटा हुआ है। केदारनाथ की तरफ जाने वाला रास्ता बेहद खराब है।
-सड़कें टूटी हुई हैं, कई जगहों पर लैंडस्लाइड हुआ है। 100 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं और 200 से ज्यादा लोगों के मरने की आशंका है। अब भी 1000 से ज्यादा लोग लापता हैं।
-ट्रेकिंग पर 40 लोग फंसे हुए हैं जिनमें विदेशी भी शामिल हैं। आज लगातार दूसरे दिन मौसम खुला है ,उम्मीद है कि आज राहत कार्यों में तेजी आएगी। आज 6 और हेलीकॉप्टर राहत कार्यों में लगाए जाएंगे। यानी कुल 16 हेलीकॉप्टर राहत कार्य में लगेंगे।
-उत्तराखंड में जगह-जगह लोग फंसे हुए हैं। टिहरी में ऐसे ही कुछ सैलानियों को बचाया गया। ये सैलानी गंगोत्री की यात्रा से वापस लौट रहे थे तभी बारिश और बाढ़ की चपेट में आकर बीच रास्ते में फंस गए। ये लोग मुख्य रास्ते पर एक पुल के बह जाने के बाद पानी से घिर गए थे।
- सेना के जवान और पुलिसवालों ने इन लोगों को रस्सी और टोकरी की मदद से बाहर निकाला। इन सभी को टिहरी के आपदा बचाव केंद्र में पहुंचाया गया है। जहां से इन्हें आगे भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि अभी भी 70-80 से लोग फंसे हुए हैं। प्रशासन उन्हें निकालने के इंतजाम कर रही है।
- यूपी के सीएम अखिलेश ने उत्तराखंड को 25 करोड़ रुपये की सहायता दी है। इसके अलावा अगर आज मौसम साफ रहा तो पीएम मनमोहन सिंह दोपहर दो बजे उत्तराखंड में प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा करेंगे।
आर्मी के जवान नही होते तो कौन बचाता इन सभी तीर्थ यात्रियों को क्यूकि मै गोरी कुण्ड तक इन जाबाज जवानो के साथ गया
 
 
 
उतराखंड में मची तबाही ने पूरे देश को हिला कर रख
दिया है। इस तबाही का शिकार सिर्फ उत्तराखंड के
बाशिंदे ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में इस
त्रासदी के सताए लोग फेले हैं । उतराखण्ड में
जो तबाही हुयी है वो किसी पत्थरदिल इंसान
को भी हिलाकर रख दे । और इस त्रासदी पर
भी सता और मीडिया अपना उल्लू सीधा कर रही हैं ।
जहाँ लाचार और बेबस लोग इस भवंडर की वजह से भूखे
प्यासे अपने आप से लड़ रहे हैं वही मीडिया वाले उनसे
उल्ट जलूल सवाल पूछ रहे हैं । जहाँ वो पांच लाख
केमरा ले जाकर न्यूज दे रहे हैं क्या वो उस जगह भूख
प्यास से मरने वालो के लिए कुछ राहत सामग्री नहीं ले
जा सकते ।
पर एक तरफ राजनीती हावी हो रखी हैं तो एक तरफ
मीडिया अपने चेनल की टी आर पी वसूल करने में
लगी हैं । क्यों इंसानियत ख़त्म हो चुकी हैं अगर
सरकार उसी दिन सही रूप से फसे लोगो की शुध ले
लेती तो अब तक बहुत से लोगो की जान भूख प्यास से बचाई
जा सकती थी । पर उस ये यही सोच रहे थे की 50
या 100 लोग मरे होंगे और पल्ला झाड लिया पर जैसे जैसे
लाशो का आना शुरू हुवा तब हमारी सरकार सचेत हुई ।
और फिर जहाँ पहले 500 सैनिक लगा रखे थे
उनकी संख्या 6000 करनी पड़ी । जहाँ 5 हेलिकॉप्टर
लगा रखे थे उनकी संख्या 60 करनी पड़ी । मतलब
सरकार भी बैठी बैठी तमाशा देख रही थी ।
एक तरफ मीडिया अपना पूरा मीडिया का सेट लेके
पहुँच गई पर किसी के लिए कोई राहत सामग्री लेके
नही पहुंची । बल्कि बिकी हुई मीडिया उनसे सवाल
ऐसे पूछ रही पांच दिन से भूखे रहने पे आप कैसा महसूस
कर रहे हो । आपका बच्चा आपकी आँखों के सामने मर
रहा था तो आप क्या कर रहे थे । मतलब वो सिर्फ
अपनी टी आर पी वसुल करने के चक्कर में उसके
दर्दो पे महरम लगाने की बजाय उसके घावों को और
बढ़ा रहे हैं ।
वाह रे मेरी सरकार वाह रे मेरी मीडिया तूम सब
बिक गए हो चंद रुपयों के खातिर । आपकी रूह मर
चुकी हैं इंसानियत को आपने बेच दिया हैं । खुद की जेब
भरने के खातिर आप लाचार बेबस लोगो को भी नही बक्श
रहे वाह रे वाह कैसे कैसे लोग आ गए इस दुनिया में ।
मीडिया तो सत्य और दुसरो की मदद के लिए बनती हैं
पर आप तो अपने चेनल पे 90 प्रतिशत झूठ दिखाते हो ।
और आप वो ही दिखाते हो जायदा बीके मतलब जिससे
आपकी जेब में मोटा पैसा आ सके ।
किसी की बहन बेटी की जब आबरू लुट रही होती तब
भी ये केमरा लेकर उसका लाइव लेने लग जाते हैं ।
अगर कोई बेटी नग्न अवस्था में मिलती हैं तो उसे
कपड़ा उड़ाने की जगह ये उसपे केमरा लगा कर न्यूज
बनाने लग जाते हैं । दंगे फंसाद में घायल लोगो की मदद
करने की जगह उसपे केमरा लगा कर उसका लाइव
सीन दिखाते रहते हैं । कोई किसी की हत्या कर
रहा हैं उसको बचाने की जगह उपसे केमरा लगा रखते
हैं । मतलब इन्हें इन्सान को बचाने से मतलब
नही अपनी जेब भरने से मतलब हैं और अगर इन्हें कोई
न्यूज नही मिलती तो ये फालतू की खबरे प्रसारित
करने लग जाते हैं ।
मेरी तरफ से इस गन्दी सरकार को और बिकी हुई
मीडिया को शत शत नमन । अगर आप अपना काम
इसी तरह से करते रहे तो वो दिन दूर नही जब
चारो तरफ मौत और भूख का तांडव होगा और आप
लोगो को अपनी जेब भरने के लिए कोई नही रोकेगा । आप
सत्य नही दिखा सकते किसी की मदद नही कर
सकते । हमारी सरकार और हमारी मीडिया नपुंसक
हैं । जो सिर्फ अपनी जेब भर्ती हैं । ऐसी मीडिया और
सरकार का होना हमारे लिए घातक हैं । ... जय हिन्द

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